अयोध्याकाण्ड
18
Oct

अयोध्याकाण्ड – श्री रामचरितमानस

यह काण्ड मनुष्य को निर्विकार बनाता है। जब जीव भक्ति रुपी सरयू नदी के तट पर हमेशा निवास करता है, तभी मनुष्य निर्विकारी बनता है। भक्ति अर्थात् प्रेम , अयोध्याकाण्ड प्रेम प्रदान करता है। राम का भरत प्रेम , राम का सौतेली माता से प्रेम आदि ,सब इसी काण्ड मेँ है। राम की निर्विकारिता इसी मेँ दिखाई देती है। अयोध्याकाण्ड का पाठ करने से परिवार मेँ प्रेम बढता है। उसके घर मेँ लडाई झगडे नहीँ होते। उसका घर अयोध्या बनता है। कलह का मूल कारण धन एवं प्रतिष्ठा है। अयोध्याकाण्ड का फल निर्वैरता है। सबसे पहले अपने घर की ही सभी प्राणियोँ मेँ भगवद् भाव रखना चाहिए।

अयोध्या कांड का नियमित पाठ करने मात्र से मनुष्य संसार सागर से पार हो जाता है। भरत जैसा उदार और सहृदय सरस व सहज भाई का जीवन चरित्र अनुकरणीय है।

 

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