अरण्यकाण्ड
18
Oct

अरण्यकाण्ड – श्री रामचरितमानस

यह निर्वासन प्रदान करता है। इसका मनन करने से वासना नष्ट होगी। बिना अरण्यवास(जंगल) के जीवन मेँ दिव्यता नहीँ आती। रामचन्द्र राजा होकर भी सीता के साथ वनवास किया। वनवास मनुष्य हृदय को कोमल बनाता है। तप द्वारा ही काम रुपी रावण का बध होगा। इसमेँ सूपर्णखा (मोह ) एवं शबरी (भक्ति) दोनो ही है। भगवान राम सन्देश देते हैँ कि मोह को त्यागकर भक्ति को अपनाओ।

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