उत्तरकाण्ड
18
Oct

उत्तरकाण्ड – श्री रामचरितमानस

इस काण्ड मेँ काकभुसुण्डि एवं गरुड संवाद को बार बार पढना चाहिए। इसमेँ सब कुछ है। जब तक राक्षस, काल का विनाश नहीँ होगा तब तक उत्तरकाण्ड मे प्रवेश नही मिलेगा। इसमेँ भक्ति की कथा है। भक्त कौन है?  जो भगवान से एक क्षण भी अलग नही हो सकता वही भक्त है। पूर्वार्ध मे जो काम रुपी रावण को मारता है उसी का उत्तरकाण्ड सुन्दर बनता है, वृद्धावस्था मे राज्य करता है। जब जीवन के पूर्वार्ध मे युवावस्था मे काम को मारने का प्रयत्न होगा तभी उत्तरार्ध – उत्तरकाण्ड सुधर पायेगा। अतः जीवन को सुधारने का प्रयत्न युवावस्था से ही करना चाहिए।

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