काल भैरव
11
Jan

महाकाल सेनापति भैरव यहां भक्तो की आंखों के सामने पीते है शराब,प्याले से हो जाती है शराब गायब

मध्यप्रदेश के उज्जैन से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर काल भैरव का मंदिर है जहां मंदिर में लगी प्रतिमा आँखों के सामने ही मदिरा का पान कर जाती है। भक्तो द्वारा चढ़ाई गयी मदिरा एक प्लेटनुमा प्याले में डाली जाती है और जैसे ही पंडित इसे भैरवजी के होठो पर लगाते है और कुछ मंत्रोचार करते है, यह देखते ही देखते गायब हो जाती है यहां जो कोई भक्त भी शराब लाता है उसे भैरव ग्रहण कर लेते है। मंदिर के बाहर देशी विदेशी मदिरा की बहुत सारी सरकारी और गैर सरकारी दुकाने है। जहां भक्त खुले आम शराब खरीदकर बाबा को अर्पित करता है और मनोकामना मांगता है।

चमत्कार को नमस्कार

मंदिर का निर्माण बहुत पुराना है जो राजा भद्रसेन द्वारा बनाया गया। पहले यह मंदिर सिर्फ तांत्रिको के लिए खुला था पर समय के साथ आम जनता के लिए भी मंदिर दर्शन के लिए खोल दिया गया। चमत्कार को नमस्कार है और यह बात इस मंदिर में लागू होती है। नास्तिक लोग भी यह करिश्मा देखकर आस्तिक बन जाते है। भक्त इन मंदिर की बोतलों को बाहर लगी दुकानों से खरीदते है और फिर मंदिर में पुजारी को देते है पुजारी इस मदिरा को एक तस्तरी में डाल कर भैरव के मुँह पर लगाते है और मदिरा भैरव पी जाते है जो बच जाती है वो प्रसाद स्वरूप भक्त ग्रहण करते है।

रहस्य है मदिरा आखिर जाती कहा है

भक्तो का मत है की यह भैरव स्वयं पीते है और कुछ अन्धविश्वासी लोग इस पर यह तर्क देते है भैरव बाबा के द्वारा पी गयी मदिरा किसी नाले के माध्यम से बाहर निकल जाती होगी लेकिन हैरानी की बात है अंग्रेजो के समय भी इस मंदिर के चारो तरफ खुदाई कराई गयी की आखिर मदिरा जाती कहाँ है पर वे भी इस रहस्य का पता नही लगा पाए इसे काल भैरव का चमत्कार मानकर खुद एक अंग्रेज अफसर ने इन्हे विदेशी मदिरा का पान करवाया।