भवाल माता
10
May

इस देवी को प्रिय है ढाई प्याला शराब

हिन्दु धर्म मे देवी देवताओ को अलग अलग भोग द्वारा खुश किया जाता है किसी को मोदक प्रिय है तो किसी को माखन-मिश्री, किसी को चूरमा पसन्द है तो किसी को अन्य व्यंजन, लेकिन राजस्थान के नागौर जिले में भवाल माता का मंदिर ऐसा भी है जहां श्रद्धालु कालीमाता को प्रसाद के रूप में ढाई प्याला शराब चढ़ाते हैं। जिले की मेड़ता तहसील के भवाल गांव से एक किलोमीटर दूर स्थित मंदिर में नवरात्र के मौके पर पूरे नौ दिन मेला चलता है और इन दिनों भक्तों को मन्नत के लिए माता को प्रसाद के रूप में ढाई गिलास शराब चढ़ाने के लिए इंतजार करना होता है।

मन्दिर मे यह है मूर्ति

मंदिर में ब्रह्माणी एवं काली माता की दो मूर्तियां है जिनमें ब्रह्माणी माता को मिठाई आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है जबकि काली माता की मूर्ति को प्रसाद के रूप में प्याला शराब चढ़ाई जाती है। किसी श्रद्धालु के मन्नत में कमी रहने या कोई अन्य चूक होने पर माता शराब ग्रहण करने से इनकार कर देती है।

 यह है तरीका भोग का

काली माता के मूर्ति के मुंह के आगे शराब का प्याला रखकर पीछे मुंह करने पर पलक झपकते ही प्याला खाली हो जाता है। इसी तरह दूसरा प्याला भी खाली हो जाता है लेकिन तीसरा प्याला आधा ही खाली होता है। आधा बचा हुआ श्रद्धालु प्रसाद के रूप में बांट लेते है. माना जाता है कि देवी केवल ढाई प्याला ही ग्रहण करती है। हालांकि कई लोग इसे केवल अंधविश्वास मानते है जबकि कई देवी की कृपा मानकर श्रद्धा से ढाई प्याला शराब चढ़ाकर अपनी मन की मुरादे पूरी करते हैं। मंदिर के बारे में अनेक किवंदतियां जुड़ी हुई है और इस पर पुजारी ने बताया कि12 एवं 13वीं शताब्दी में यह मंदिर बना है। उन्होंने बताया कि मंदिर में एक शिलालेख भी है जिसमें विक्रम संवत 1170 लिखा हुआ है।

कलात्मक बना हुआ है मन्दिर

मंदिर लाल पत्थर में बना हुआ है तथा दीवारों पर कलात्मक देवी देवताओं की मूर्तियां खुदी हुई है जो दीवारों के बाहर एवं भीतरी दोनों तरफ है। पुजारी ने बताया कि मंदिर में उनकी यह चौथी पीढ़ी है जो मंदिर में सेवा कर रही है। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वजों एवं किवंदतियां के मुताबिक मंदिर के स्थान पर पहले एक चबूतरा बना हुआ था और उस पर देवी की दो मूर्तियां थी।

देश भर से आते है हज़ारो भक्त

मंदिर के पुजारी बजरंग गिरी ने बताया कि माता के श्रद्धालु मन्नतपूरी होने या मन्नत के लिए कभी भी शराब चढ़ा सकते हैं लेकिन नवरात्रि में मेला लगने के कारण स्थानीय लोगों के अलावा मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में काम कर रहे राजस्थान के लोगों का तांता लगा हुआ रहता है।

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