tannot mata border temple
11
May

पाकिस्तान आज भी कांपता है भारत के इस मंदिर का नाम सुनकर

भारत मे एक ऐसा मंदिर भी है जिसका नाम सुनकर पाकिस्तान की कांप जाती है रूह,जी हां भारत मे हमेशा देवी देवताओ ने भी दुश्मनों से देशवासियो की रक्षा की है।जगह भारत-पाकिस्तान सीमा से लगने वाले राजस्थान राज्य के जैसलमेर जिला मुख्यालय और जैसलमेर से ठीक 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तनोट माता का मंदिर, यह मंदिर 1200 साल पुराना माना जाता है वैसे तो यह मंदिर सदैव ही आस्था का केंद्र रहा है लेकिन 1965 कि भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद यह मंदिर देश –विदेश  में अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हो गया। 1965 कि लड़ाई में पाकिस्तानी सेना कि तरफ से गिराए गए करीब 3000 बम भी मंदिर का कुछ नही बिगाड़ सके। यहाँ तक कि मंदिर परिसर में गिरे 450 बम तो फटे तक नहीं ये बम आज भी हमे मंदिर परिसर में बने एक संग्रहालय में श्रद्धालुओ के दर्शन के लिए रखे हुए है।

विजय स्तंभ का निर्माण

1965 कि लड़ाई के बाद इस मंदिर की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने ले ली और यहाँ अपनी एक चौकी भी बना ली। इतना ही नहीं एक बार फिर 4 दिसंबर 1971 कि रात को पंजाब रेजिमेंट  और सीमा सुरक्षा बल कि एक कंपनी ने माँ कि कृपा से लोंगेवाला में पाकिस्तान कि पूरी टैंक रेजिमेंट को धूल चटा दी थी और लोंगेवाला को पाकिस्तानी टैंको का कब्रिस्तान बना दिया था। लोंगेवाला भी तनोट माता के पास ही है।लोंगेवाला कि विजय के बाद मंदिर परिदसर में एक विजय  स्तंभ का निर्माण किया गया जहा अब हर वर्ष 16 दिसंबर को सैनिको कि याद में उत्सव मनाया जाता है।

हिंगलाज देवी का है एक रूप

तनोट माता को आवड माता के नाम से भी जाना जाता है तथा यह हिंगलाज माता का ही एक रूप है। हिंगलाज माता का शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है। हर वर्ष आश्विन और चै‍त्र नवरात्र में यहाँ विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।

तनोट माता मंदिर का इतिहास

बहुत पहले मामडि़या नाम के एक चारण थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्त करने की लालसा में उन्होंने हिंगलाज शक्तिपीठ की सात बार पैदल यात्रा की। एक बार माता ने स्वप्न में आकर उनकी इच्छा पूछी तो चारण ने कहा कि आप मेरे यहाँ जन्म लें।

जवानों की है माता में गहरी श्रद्धा व विश्वास

तनोट चौकी पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवानों का कहना है कि माता बहुत शक्तिशाली है और हर मनोकामना पूर्ण करती है। हमारे सिर पर हमेशा माता की कृपा बनी रहती है। दुश्मन भी हमारा बाल भी बाँका नहीं कर सकता है व हमे हर समय लगता है कि जैसे कोई एक विशेष शक्ति हमे दुश्मनों से लड़ने का साहस प्रदान करती है ।

जीवित रहते हुए की थी स्थापना

माड़ प्रदेश में आवड़ माता की कृपा से भाटी राजपूतों का सुदृढ़ राज्य स्थापित हो गया। राजा तणुराव भाटी ने इस स्थान को अपनी राजधानी बनाया और आवड़ माता को स्वर्ण सिंहासन भेंट किया। विक्रम संवत 828 ईस्वी में आवड़ माता ने अपने भौतिक शरीर के रहते हुए यहाँ अपनी स्थापना की।