lord Ayyappam
30
Jul

भगवान शिव के तीसरे पुत्र के जन्म की कहानी

अय्यप्पा स्वामी की जन्म कथा (Ayyappan Birth Story in Hindi)
भगवान शिव के दो पुत्रों ( गणेश और कार्तिक) के अलावा भगवान शिव को एक और पुत्र था। शिव के इस पुत्र ने कब, कहां और कैसे जन्म लिया। भगवान शिव के तीसरे बेटे की कहानी शुरू होती है उस समय से जब मां दुर्गा ने असुरों के राजा महिशासुर का वध किया था। महिशासुर को भगवान शिव से वरदान प्राप्त था। जिसका दुरुपयोग करते हुए वह देवी-देवताओं और मानव जाति को परेशान किया करता था।

अय्यप्पा ने किया राक्षसी महिषी का वध (Monstrous Mahisi Kill by Ayyappan in Hindi)

महिशासुर की एक बहिन थी महिषि, जो देवताओं से नाराज थी क्योंकि उन्होंने उनके प्यारे भाई का वध कर दिया था। जबकि महिषी ने ब्रह्मा जी को खुश करने के लिए तपस्या शुरू कर दी थी। उसकी तपस्या से खुश होकर ब्रह्मा ने उसे अभेद्य का वरदान दिया। उसे शिव और विष्णु की संयुक्त शक्ति प्राप्त थी। इस वरदान के मिलते ही महिषि ने पूरे संसार में तानाशाही शुरू कर दी थी। उससे आहत हुए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर लिया। समुद्र मंथन के समय जब भगवान विष्णु ने मोहनी का रूप धारण किया।  मोहिनी एक ऐसी सुंदरी थी, जो राक्षसों को रिझाती थी। लेकिन इस बार मोहिनी भगवान शिव के पास पहुंची थी। वह उन्हें रिझाने में सफल हो गई। इसके फलस्वरूप मोहनी से एक बच्चे का जन्म हुआ। जिसे भगवान शिव और विष्णु जी ने पंपा नदी के तट पर छोड़ दिया।

तब मोहिनी के रूप में विष्णु और भगवान शिव के मिलन सेे शिव के तीसरे पुत्र ने जन्म लिया। जिसका नाम अयप्पन रखा गया था। भगवान शिव और विष्णु अवतार मोहिनी के पुत्र होने के कारण इन्हें “हरिहर” के नाम से भी जाना जाता हैं। अयप्पन को राजा पंडलम ने गोद लिया था। एक दिन मां के इलाज के लिए अय्यप्पा शेरनी का दूध लाने घने जंगलों में गए तो वहां उनका सामना राक्षसी महिषी से हुआ जिनका उन्होंने वध कर दिया। कथा के अनुसार राक्षसी महिषी को वरदान था, की उसकी मृत्यु केवल हरिहर के पुत्र के हाथों ही होगी। केरला के एक जिले में आज भी अयप्पन को भगवान का दर्जा दिया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

अय्यप्पा स्वामी हिन्दू धर्म के देवता हैं। मान्यता के अनुसार अय्यप्पा भगवान शिव और विष्णु अवतार मोहिनी के पुत्र थे। इसलिए इन्हें “हरिहर पुत्र” के नाम से भी जाना जाता हैं। पुराणों के अनुसार अय्यप्पा शास्ता का अवतार हैं।

अय्यप्पा का स्वरूप (Character of Ayyappan in Hindi)

भगवान अय्यप्पा हमेशा योगिक मुद्रा में रहते हैं तथा इनके गले में भारी हार रहता है। इनके गले में जन्म से ही यह हार होने के कारण इन्हें मणिकंदन के नाम से भी जाना जाता है। इनका वाहन शेर है तथा शस्त्र तीर- धनुष है। इनके दो हाथ है और मुख पर हमेशा हल्की मुस्कान रहती है।

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अय्यप्पा से जुड़ी मुख्य बातें (Important Fact of Ayyappan in Hindi)

  1. भगवान अय्यप्पा मुख्य रूप से दक्षिण भारत में पूजे जाते हैं।
  2. अय्यप्पा भगवान शिव और विष्णु के पुत्र है।
  3. भगवान अय्यप्पा बाल ब्रह्मचारी है।
  4. दस वर्ष से अधिक और 60 वर्ष से कम आयु की महिलाएं भगवान अय्यप्पा के दर्शन नहीं कर सकती हैं।
  5. जन्म से ही गले में स्वर्ण घंटी होने के कारण इनका नाम मणिकंदन पड़ गया।

मकरविलक्कु का प्रसिद्ध त्यौहार ( The Famous Festival Makaravilakku in Hindi)

महाशिवरात्रि के पावन पर्व के दिन ही सबरीमाला के अय्यप्पा मंदिर में मकरविलक्कु भी आयोजित होता है। यह उत्साह 41 दिन तक चलता है। इस दौरान भगवान अय्यप्पा की प्रतिमा को श्रृंगारित करने के लिए खासतौर पर पंडालम महल से गहने लाए जाते हैं। इस त्यौहार के दौर एक बहुत ही खूबसूरत जुलूस निकाला जाता है।

अय्यप्पा जी के मुख्य मंदिर (Famous Temples of Ayyappan)

  • सबरीमाला का अय्यप्पा स्वामी मंदिर (Sabarimala Ayyappan Temple)
  • श्री धर्म शास्ता मंदिर (Sree Dharma Sastha Temple)
  • कुल्लाथूपूजाह मंदिर, केरल (Kulathupuzha Temple)
  • आर्यकावु शास्ता मंदिर, केरल (Aryankavu Shastha Temple)
  • अचनकोइल शास्ता मंदिर, केरल (Achankoil Sasta Temple)

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