sakat-chauth
24
Jan

सकट चौथ की कथा

एक प्रचलित कथा के अनुसार एक गांव में एक साहूकार और साहूकारनी रहते थे। दोनों ही कोर्इ पूजा पाठ नहीं करते थे। संभवत इसी कारण उनकी कोर्इ संतान नहीं थी। एक दिन साहूकारनी अपने पड़ोसी के घर गयी तो उसने देखा कि वो कोर्इ पूजा कर रही है। पूछने पर पता चला कि उस दिन सकट चौथ थी आैर पड़ोसिन उसी की पूजा कर रही थी। साहूकारनी ने उससे पूछा कि चौथ का व्रत करने से क्या होता हैं इस पर पड़ोसन ने कहा कि इसे करने से अन्न, धन, सुख, सुहाग, संतान सब मिलता है। इस पर साहूकारनी ने कहा यदि वो गर्भवती हुर्इ तो सवा सेर तिलकुट बना कर चौथ का व्रत करेगी। गणपति की कृपा वो गर्भवती हो गर्इ। तब उसने संतान के जन्म पर व्रत पूजा करने का इरादा किया। कुछ समय बाद उसका पुत्र हुआ तो फिर उसने व्रत को टाल दिया आैर कहा कि जब उसके बेटे का विवाह होगा तब वो सकट का व्रत करेगी। बेटा बड़ा हुआ आैर उसका परदेश में विवाह सुनिश्चित हो गया। जब बेटा बरात लेकर गया तब भी साहूकारिनी ने व्रत करने का इरादा नहीं दिखाया। इससे गणेश भगवान रुष्ट हो गए, आैर चौथ माता भी नाराज हो गर्इ। जिसके चलते बेटा फेरों के बीच से अदृश्य हो गया आैर चौथ माता ने उसे जंगल में पीपल के पेड़ पर बिठा दिया। बहुत खोजने पर भी जब वर नहीं मिला तो विवाह आधा हुआ रह गया आैर सभी अपने घर चले गए। एक दिन उस युवक की अ़र्द्घ विवाहित पत्नी अपनी सहेलियों के साथ पूजा के लिए दूब लेने जंगल गर्इ। रास्ते में वही पीपल का पेड़ पड़ा जिस पर उसका आधा पति बैठा था। उसने आवाज दी आे में मेरी अर्द्घ ब्याही। डर कर लड़की घर चली आर्इ पर दुख से सूखने लगी। जब उसकी मां ने उसका कारण पूछा तो उसने जंगल की घटना का जिक्र किया। उसकी मां उसी स्थान पर गर्इ। तो उसने देखा कि सेहरा पहने साफा बांधे उसका जमार्इ पीपल पर बैठा है। उसने इसका कारण पूछा तो लड़के ने बताया कि उसकी मां ने बोलने के बाद भी चौथ का तिलकुट नहीं किया, इस लिए चौथ माता ने नाराज हो कर उसे वहां बैठा दिया। यह सुनकर लड़की की मां, साहूकारनी के घर गई और उससे पूछा की तुमने सकट चौथ का कुछ बोला था तो उसने कहा हां तिलकुट बोला था। तब उसकी समधिन ने कहा कि बोलने के बावजूद अपना वचन ना निभाने के कारण सबको दंड भुगतना पड़ रहा है। इस पर साहूकारिनी ने कहा कि जैसे ही उसका बेटा बहु लेकर घर आयेगा वो तिलकुट करेगी। इससे गणेश जी प्रसन्न हो गए और उसके बेटे को मुक्त करके फेरे पूरे करने का आर्शिवाद दिया। धूमधाम से विवाह हो गया आैर वह बहु को लेकर घर आया। इसके बाद प्रसन्न साहूकारनी ने ढाई मन तिलकुट का पूजन किया। साथ ही प्रार्थना की कि हे श्री गणेश आैर चौथ माता जैसे आपके आर्शिवाद से मेरे कष्ट दूर हुए एेसे सबके दूर हों आैर वो हमेशा सकट चौथ आैर तिलकुट करने लगी। तभी से सब लोग ये कथा को पढ़ कर इस व्रत को करते हैं।