Sunderkand
11
Apr

श्रीरामचरितमानस सुन्दर काण्ड

तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस का पाँचवाँ अध्याय सुन्दरकाण्ड है। सुन्दरकाण्ड में श्री हनुमानजी माता सीता की खोज में लंका जाते हैं। वहाँ माता सीता से मिलकर अशोक वाटिका में फल खाने के लिये जाते है। वहाँ रावण का एक पुत्र अक्षय कुमार उनको रोकने के लिये आता है और हनुमान जी द्वारा मारा जाता है। इसके उपरान्त रावम का दूसरा पुत्र मेघनाद आता है और उन्हें पकड़ कर रावण के दरबार में ले जाता है। रावण उनकी पूंछ में आग लगाने की आज्ञा देता है। पूंछ में लगी आग से हनुमानदी सारी लंका में आग लगा देते हैं और फिर वापस लौटकर श्री राम जी को वहां की सब सूचनाएं देते हैं। सुन्दरकाण्ड का नित्य पाठ करने से हनुमानजी अति प्रसन्न होते हें और अपने भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

 

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।

अर्थ- श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।

अर्थ- हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूं। आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्‍बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कार दीजिए।

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