RAM BHAGAT HANUMAN JI
31
Mar

हनुमान जयंती

हनुमान जंयती को भगवान हनुमान के जन्‍म के उपलक्ष्‍य में मनाया जाता है। चैत्र मास के 15 वें दिन को भगवान हनुमान का जन्‍मदिवस होता है। हनुमान जी की पूजा सभी हिंदुओं के द्वारा की जाती है और कई मंदिर भी हनुमान जी को समर्पित होते हैं। जिन मंदिरों में भगवान राम की पूजा होती है वहां भी हनुमान जी की पूजा की जाती है।
लोक पंरपराओं के अनुसार, हनुमान जी के पास कई असीम शक्तियां थी, जिनके कारण वह बुरी शक्तियों और आत्‍माओं को दूर भगा देते थे। उनके जन्‍मदिवस के अवसर पर भी नकारात्‍मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से छुटकारा पाने के लिए पूजा की जाती है।
हनुमान जयंती के महत्‍व :

माना जाता है कि भगवान हनुमान ने एक बार माता सीता को सिंदुर लगाते हुए देखा। उन्‍होंने जिज्ञासवश माता सीता से पूछा कि वह यह लाल रंग का पाउडर अपने माथे पर क्‍यूं लगा रही है। इस पर माता सीता ने कहा कि ऐसा करने से भगवान राम की आयु बढ़ेगी। ऐसा सुनकर, भगवान हनुमान गए और उन्‍होंने अपने पूरे बदन पर सिंदुर का लेप कर लिया, ताकि भगवान राम की आयु दीर्घ हो जाएं।

तभी से हनुमान जी हमेशा लाल सिंदूर में रंगे हुए दिखायी देते हैं।

तब से लेकर आज तक, भगवान हनुमान की पूजा सामग्री में सिंदुर भी चढ़ाया जाता है।

माना जाता है कि भगवान हनुमान, भगवान शिव का रूप हैं। वो निष्‍ठा और भक्ति का अवतार हैं। उनकी ताकत अतुलनीय है और उन्‍हें महान बौद्धिक माना जाता है। इसलिए, लोग, उनके जन्‍मदिवस पर उपवास रखते हैं। हनुमान चालीसा का जाप करते हैं और प्रसाद बांटते हैं।
हनुमानजी बुद्धि और बल के दाता हैं। उत्तरकांड में भगवान राम ने हनुमानजी को प्रज्ञा, धीर, वीर, राजनीति में निपुण आदि विशेषणों से संबोधित किया है। हनुमानजी बल और बुद्धि से संपन्न हैं। हनुमान को मनोकामना पूर्ण करने वाला देवता माना जाता है, इसलिए मन्नत मानने वाले अनेक स्त्री-पुरुष हनुमान की मूर्ति की श्रद्धापूर्वक निर्धारित प्रदक्षिणा करते हैं।
इस प्रकार, भगवान हनुमान के जन्‍म को हनुमान जयंती नाम दिया गया, इस दिन सभी श्रद्धालु, पूजा-पाठ करते हैं और शक्ति प्राप्‍त करने की उपासना करते हैं।

हनुमान जयंती महोत्सव :

  • हिन्दू धर्म में हनुमान जयंती बड़ा ही धार्मिक पर्व है। इसे बड़ी ही श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुबह से ही हनुमान भक्त लम्बी लम्बी कतार में लग कर हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं. सुबह से ही मंदिरों में भगवान् की प्रतिमा का पूजन -अर्चन शुरू हो जाता है। मंदिरों में भक्त भगवान् की प्रतिमा पर जल, दूध, आदि अर्पण कर भगवान् को सिन्दूर तथा तेल चढ़ाते हैं।
  • हनुमानजी की प्रतिमा पर लगा सिन्दूर अत्यन्त ही पवित्र होता है, भक्तगण इस सिन्दूर का तिलक अपने मस्तक पर लगाते हैं। इसके पीछे यह मान्यता है कि इस तिलक के द्वारा वे भी हनुमानजी की कृपा से हनुमानजी की तरह शक्तिशाली, ऊर्जावान तथा संयमित बनेंगे।
  • इस दिन मंदिरों में सुबह से ही प्रसाद वितरण का कार्यक्रम शुरू हो जाता है। प्रत्येक मंदिर में भक्तों का ताँता लगा रहता है. कई मंदिरों में हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में भंडारे का आयोजन भी किया जाता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु, हनुमान भक्त मंदिरों में पहुंचते हैं।

हनुमान जयंती पूजा विधि :

  • हिन्दू मान्यता के अनुसार हनुमानजी सिन्दूरी अथवा केसर वर्ण के थे , इसीलिए हनुमानजी की मुर्ति को सिन्दूर लगाया जाता है. पूजन विधि के दौरान सीधे हाथ की अनामिका ऊँगली से हनुमानजी की प्रतिमा को सिन्दूर लगाना चाहिए।
  • हनुमानजी को केवड़ा, चमेली और अम्बर की महक प्रिय है , इसलिए जब भी हनुमानजी को अगरबत्ती या धूपबत्ती लगानी हो, तो इन महक वाली ही लगाना चाहिए, हनुमानजी जल्दी प्रसन्न होंगे। अगरबत्ती को अंगूठे तथा तर्जनी के बीच पकड़ कर , मूर्ति के सामने 3 बार घडी की दिशा में घुमाकर, हनुमानजी की पूजा करना चाहिए।
  • हनुमानजी के सामने किसी भी मंत्र का जाप कम से कम 5 बार या 5 के गुणांक में करना चाहिए।
  • ऐसे तो भक्त हर दिन अपने भगवान को पूज सकते हैं ,परन्तु फिर भी हिन्दू धर्म में विशेषकर महाराष्ट प्रान्त में मंगलवार को हनुमानजी का दिन बताया गया है. इसलिए इस दिन हनुमानजी की पूजा करने का विशेष महत्त्व है।
  • भारत के अलग अलग प्रान्त में मंगलवार के साथ साथ शनिवार को भी हनुमानजी का दिन माना जाता है , और इसीलिए  इन दोनों दिनों का बहुत महत्व है। भक्तगण इन दिनों में हनुमान चालीसा, सुंदरकांड आदि का पाठ करते हैं। इस दिन हनुमानजी की प्रतिमा पर तेल तथा सिन्दूर  भी चढ़ाया जाता है।