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Panchatantra

The legend goes that King Amarashakti, who used to rule Mahilaropya in southern India, had three dull-headed sons. The king appointed scholar Vishnu Sharma to educate them.

After realizing that conventional tools and techniques of teaching will not work with his new students, Vishnu Sharma decided to write a collection of more than 50 stories that focused on five strategies:
Book 1: The Gaining of Friends features stories that talk about how to win friends.
Book 2: The Separation of Friends features stories about how one can lose friends.
Book 3: Ill-Considered Actions tells us how we can lose what is important to us when we act without thinking.
Book 4: Loss of Gains tells us that it is always possible to get out of a difficult situation without losing anything.
Book 5: Of Crows and Owls features stories that talk about the strategies and rules of war and peace.
The collection is divided into five volumes, and hence the name Panchatantra (‘pancha’ means five and ‘tantra’ means systems).

The Panchatantra was translated into a number of languages, including English, Persian, Arabic, Hebrew, Spanish, Greek, Syriac and almost all Indian languages. The German version of the Panchatantra was one of the earliest books that the Gutenberg Press printed after the Bible.

तीन साधु

ज्ञान की खोज में एक बार तीन साधु हिमालय पर जा पहुंचे। वहां पहुंचकर तीनों साधुओं को बहुत भूख लगी। देखा तो उनके पास तो मात्र दो ही रोटियां थी। उन तीनों ने तय किया कि वो भूखे ही सो जाएंगे। ईश्वर जिसके सपने में आकर रोटी खाने का संकेत देंगे वो ही ये रोटियां…

बंदर का कलेजा

किसी नदी के किनारे एक बहुत बड़ा पेड़ था। उस पर एक बंदर रहता था। उस पेड़ पर बड़े मीठे-रसीले फल लगते थे। बंदर उन्हें भरपेट खाता और मौज उड़ाता। वह अकेला ही मजे में दिन गुजार रहा था। एक दिन एक मगर कहीं से निकलकर उस पेड़ के तले आया, जिस पर बंदर रहता…

नकलची बन्दर

एक टोपी बेचने वाला था वह शहर से टोपियाँ लाकर गाँव में बेचा करता था एक दिन वह दोपहर के समय जंगल में जा रहा था थककर वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया उसने टोपियों की गठरी एक तरफ़ रख दी ठंडी हवा चल रही थी लेटते ही टोपी वाले को नींद आ गई…

जैसे को तैसा

किसी नगर में एक व्यापारी का पुत्र रहता था। दुर्भाग्य से उसकी सारी संपत्ति समाप्त हो गई। इसलिए उसने सोचा कि किसी दूसरे देश में जाकर व्यापार किया जाए। उसके पास एक भारी और मूल्यवान तराजू था। उसका वजन बीस किलो था। उसने अपने तराजू को एक सेठ के पास धरोहर रख दिया और व्यापार…

बकरा और ब्राह्मण

किसी गांव में सम्भुदयाल नामक एक ब्राह्मण रहता था। एक बार वह अपने यजमान से एक बकरा लेकर अपने घर जा रहा था। रास्ता लंबा और सुनसान था। आगे जाने पर रास्ते में उसे तीन ठग मिले। ब्राह्मण के कंधे पर बकरे को देखकर तीनों ने उसे हथियाने की योजना बनाई। एक ने ब्राह्मण को…

वंश की रक्षा

किसी पर्वत प्रदेश में मन्दविष नाम का एक वृद्ध सर्प रहा करता था। एक दिन वह विचार करने लगा कि ऐसा क्या उपाय हो सकता है, जिससे बिना परिश्रम किए ही उसकी आजीविका चलती रहे। उसके मन में तब एक विचार आया। वह समीप के मेढकों से भरे तालाब के पास चला गया। वहां पहुँचकर…

गलत मार्ग का परिणाम

किसी ग्राम में किसान दम्पती रहा करते थे। किसान तो वृद्ध था पर उसकी पत्नी युवती थी। अपने पति से संतुष्ट न रहने के कारण किसान की पत्नी सदा पर-पुरुष की टोह में रहती थी, इस कारण एक क्षण भी घर में नहीं ठहरती थी। एक दिन किसी ठग ने उसको घर से निकलते हुए…

चंचलता से बुद्धि का नाश

किसी तालाब में कम्बुग्रीव नामक एक कछुआ रहता था। तालाब के किनारे रहने वाले संकट और विकट नामक हंस से उसकी गहरी दोस्ती थी। तालाब के किनारे तीनों हर रोज खूब बातें करते और शाम होने पर अपने-अपने घरों को चल देते। एक वर्ष उस प्रदेश में जरा भी बारिश नहीं हुई। धीरे-धीरे वह तालाब…

आवाज ने खोला भेद

किसी नगर में एक धोबी रहता था। अच्छा चारा न मिलने के कारण उसका गधा बहुत कमजोर हो गया था। एक दिन धोबी को जंगल में बाघ की एक खाल मिल गई। उसने सोचा कि रात में इस खाल को ओढ़ाकर मैं गधे को खेतों में छोड़ दिया करुँगा। गाँववाले इसे बाघ समझेंगे और डर…

चतुराई से कठिन काम भी संभव

एक जंगल में महाचतुरक नामक सियार रहता था। एक दिन जंगल में उसने एक मरा हुआ हाथी देखा। उसकी बांछे खिल गईं। उसने हाथी के मृत शरीर पर दांत गड़ाया पर चमड़ी मोटी होने की वजह से, वह हाथी को चीरने में नाकाम रहा। वह कुछ उपाय सोच ही रहा था कि उसे सिंह आता…

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