kashi vishwanath
17
Oct

Kashi Vishwanath Temple

वाराणसी को बनारस तथा काशी के नाम से ही जाना जाता है जो उत्तर प्रदेश राज्‍य के उत्तरी भारत में प्रमुख शहर है। पवित्र नदी गंगा के किनारे स्थित इस शहर का हिन्‍दुओं के लिए अत्‍यंत धार्मिक महत्‍व है। वाराणसी काशी विश्‍वनाथ मंदिर का घर है जो भगवान शिव का समर्पित है। इसमें बारह ज्‍योतिर्लिंगों में से एक स्‍थापित हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर कई बार बनाया गया। नवीनतम संरचना जो आज यहां दिखाई देती है वह 18वीं शताब्‍दी में बनी थीं। हजारों धार्मिक यात्री यहां पवित्र ज्‍योतिर्लिंगम के दर्शन करने के लिए उनके अभिषेक के अवसर पर यहां जमा होते हैं, जिसमें गंगा नदी का पानी लिया जाता है।सावन आते ही भगवान शिव के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस मंदिर के दर्शन को मोक्ष प्रदायी माना जाता है। इस मंदिर का दर्शन करने वालों में आदि शंकराचार्यसन्त एकनाथ, रामकृष्ण परमहंस, स्वांमी विवेकानंद, स्वाआमी दयानंद, गोस्वारमी तुलसीदास जैसे बड़े महापुरुष रहे।
इसके धार्मिक महत्‍व के अलावा यह मंदिर वास्‍तुकला की दृष्टि से भी अनुपम है। इसका भव्‍य प्रवेश द्वार देखने वालों की दृष्टि में मानो बस जाता है। मंदिर का बाहरी स्वरुप अनेक बार तोड़ दिया गया और यह पुनर्गठित हुआ। आखिरी बार औरंगज़ेब ने इस मंदिर को तोड़ कर ज्ञानवापी मस्जिद बनवायी थी। ऐसा कहा जाता है कि एक बार इंदौर की रानी अहिल्‍या बाई होलकर के स्‍वप्‍न में भगवान शिव आए। वे भगवान शिव की भक्‍त थीं और इसलिए उन्‍होंने 1777 में यह मंदिर निर्मित कराया। महाराजा रणजीत सिंह ने इस मन्दिर पर स्वर्ण कलश (सोने का शिखर) चढ़वाया था।
विश्‍वनाथ खण्‍ड को पुरान शहर भी कहा जाता है जो दशाश्‍व मेध घाट और गोदुलिया के बीच मणिकर्णिका घाट के दक्षिण और पश्चिम तक नदी की उत्तर दिशा में वाराणसी के मध्‍य स्थित है। यह पूरा क्षेत्र ही घूमने योग्‍य है जहां अनेक मठ और लिंग हर कोने में दिखाई देते हैं और यहां धार्मिक यात्रियों, पंडों की गतिविधियां तथा भक्‍तों को मंदिर में अर्पित करने की सामग्री की दुकानें बड़ी संख्‍या में हैं।
स‍करी गलियों से विश्‍वनाथ गली तक पहुंचते हुए यह विश्‍वनाथ या विश्‍वेश्‍वर मंदिर ”सभी के भगवान” माने जाते हैं और इसके शिखर पर स्‍वर्ण लेपन होने के कारण इसे स्‍वर्ण मंदिर भी कहते हैं। परिसर के अंदर, जो एक दीवार के पीछे छुपा है और यहां एक अत्‍यंत अनोखे प्रकार के द्वार से पहुंचा जाता है, जो भारत का सबसे महत्‍वपूर्ण शिवलिंग है और यह चिकने काले पत्‍थर से बना हुआ है और इसे ठोस चांदी के आधार में रखा गया है। महाकाल और दण्‍ड पाणी के क्रुद्ध संरक्षकों के आश्रम और अविमुक्‍तेश्‍वर के लिंग भी इस मंदिर के संकुल में हैं।
यहां भक्‍त जन आकर संकल्‍प करते हैं और पंच तीर्थ यात्रा शुरू करने के पहले अपने मन की भावना यहां व्‍यक्‍त करते हैं। मुख्‍य सड़क पर कुछ उत्तर दिशा में 13वीं शताब्‍दी में बनी रजिया की मस्जिद दिखाई देती है जो पूर्व विश्‍वनाथ मंदिर के भग्‍नावशेषों के साथ खड़ी है।
वाराणसी एक ऐसा स्‍थान कहा जाता है जहां प्रथम ज्‍योतिर्लिंग है, शिव द्वारा प्रकाश के उज्‍जवल स्‍तंभ से अन्‍य देवाओं पर उनकी श्रेष्‍ठता प्रदर्शित होती है जो पृथ्‍वी की पर्त तोड़ कर निकली और स्‍वर्ग की ओर इसकी ज्‍वाला गई। यहां घाटों और गंगा नदी के अलावा मंदिर में स्‍थापित शिव लिंग वाराणसी का धार्मिक आकर्षण बना हुआ है।