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  • कीचक वध की कथा
    22
    Jan

    कीचक वध की कथा

    पाण्डवों को मत्स्य नरेश विराट की राजधानी में निवास करते हुए दस माह व्यतीत हो गये। सहसा एक दिन राजा विराट का साला कीचक अपनी बहन सुदेष्णा से भेंट...

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  • कृष्ण का शान्ति प्रस्ताव
    22
    Jan

    कृष्ण का शान्ति प्रस्ताव

    राजा सुशर्मा तथा कौरवों को रणभूमि से भगा देने के बाद पाण्डवों ने स्वयं को सार्वजनिक रूप से प्रकट कर दिया। उनका असली परिचय पाकर विराट को अत्यन्त प्रसन्नता...

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  • 16
    Jan

    विराट नगर पर कौरवोँ का आक्रमण

    कीचक के वध की सूचना आँधी की तरह चारों ओर फैल गई। वास्तव में कीचक बड़ा पराक्रमी था और उससे त्रिगर्त के राजा सुशर्मा तथा हस्तिनापुर के कौरव आदि...

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  • महाभारत युद्ध का आरम्भ
    16
    Jan

    महाभारत युद्ध का आरम्भ

    महाभारत युद्ध में दोनों पक्षों की सेनाओं का सम्मिलित संख्या बल अठ्ठारह अक्षौहिणी था। युधिष्ठिर सात अक्षौहिणी सेना के, जबकि दुर्योधन ग्यारह अक्षौहिणी सेना का स्वामी था। पाण्डव तथा...

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  • भीष्म अभिमन्यु वध
    16
    Jan

    भीष्म-अभिमन्यु वध

    पहले दिन से ही महाभारत का युद्ध बड़े ही भयंकर रूप से प्रारम्भ हुआ। आठवें दिन का युद्ध भी घनघोर था। इस दिन अर्जुन की दूसरी पत्नी उलूपी से...

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  • 16
    Jan

    जयद्रथ, घटोत्कच तथा गुरु द्रोण के वध की कथा

    अर्जुन की प्रतिज्ञा सुनकर जयद्रथ काँपने लगा। द्रोणाचार्य ने उसे आश्वासन दिया कि वे ऐसा व्यूह बनाएँगे कि अर्जुन जयद्रथ को न देख सकेगा। वे स्वयं अर्जुन से लड़ते...

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  • कर्ण अर्जुन
    16
    Jan

    कर्ण और अर्जुन का संग्राम

    द्रोणाचार्य की मृत्यु के बाद दुर्योधन पुन: शोक से आतुर हो उठा। अब द्रोणाचार्य के बाद कर्ण उसकी सेना का कर्णधार हुआ। पाण्डव सेना का आधिपत्य अर्जुन को मिला।...

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  • भीम और दुर्योधन का संग्राम
    23
    Oct

    भीम और दुर्योधन का संग्राम तथा दुर्योधन के वध की कथा

    महाभारत का युद्ध अपने अंत की ओर बढ़ रहा था। कौरवों की ओर से अश्वत्थामा, कृतवर्मा, कृपाचार्य तथा दुर्योधन के अतिरिक्त कोई भी अन्य महारथी जीवित नहीं बचा। अब...

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  • परीक्षित के जन्म की कथा
    23
    Oct

    परीक्षित के जन्म की कथा

    द्रौपदी को जब समाचार मिला कि उसके पाँचों पुत्रों की हत्या अश्वत्थामा ने कर दी है, तब उसने आमरण अनशन कर लिया और कहा कि वह अनशन तभी तोड़ेगी,...

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  • पाण्डवों का हिमालय गमन
    23
    Oct

    पाण्डवों का हिमालय गमन

    धर्मराज युधिष्ठिर के शासनकाल में हस्तिनापुर की प्रजा सुखी तथा समृद्ध थी। कहीं भी किसी प्रकार का शोक व भय आदि नहीं था। कुछ समय बाद श्रीकृष्ण से मिलने...

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