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Stories from Mahabharat

  • द्रौपदी स्वयंवर
    15
    Feb

    द्रौपदी स्वयंवर

    लाक्षागृह से जीवित बच निकलने के पश्चात पाण्डव अपनी माता कुन्ती सहित वहाँ से एकचक्रा नगरी में जाकर मुनि के वेष में एक ब्राह्मण के घर में निवास करने...

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  • पाण्डव द्रौपदी विवाह
    15
    Feb

    पाण्डव-द्रौपदी विवाह

    अर्जुन द्वारा द्रौपदी को स्वयंवर में विजित कर लिये जाने के पश्चात पाँचों पाण्डव द्रौपदी को साथ लेकर वहाँ पहुँचे, जहाँ वे अपनी माता कुन्ती के साथ निवास कर...

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  • कौरवों का कपट
    15
    Feb

    कौरवों का कपट

    खाण्डव वन के दहन के समय अर्जुन ने मय दानव को अभयदान दे दिया था। इससे कृतज्ञ होकर मय दानव ने अर्जुन से कहा- “हे कुन्तीनन्दन! आपने मेरे प्राणों...

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  • यक्ष युधिष्ठिर संवाद
    15
    Feb

    यक्ष-युधिष्ठिर संवाद

    पाण्डव द्रौपदी सहित वन में पर्णकुटि बनाकर रहने लगे। वे कुछ दिनों तक काम्यकवन में रहने के पश्‍चात द्वैतवन में चले गये। वहाँ एक बार जब पाँचों भाई भ्रमण...

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  • अर्जुन को दिव्यास्त्र प्राप्ति
    15
    Feb

    अर्जुन को दिव्यास्त्र प्राप्ति

    एक बार वीरवर अर्जुन उत्तराखंड के पर्वतों को पार करते हुए एक अपूर्व सुन्दर वन में जा पहुँचे। वहाँ के शान्त वातावरण में वे भगवान शंकर की तपस्या करने...

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  • युधिष्ठिर द्वारा दुर्योधन की रक्षा
    15
    Feb

    युधिष्ठिर द्वारा दुर्योधन की रक्षा

    गन्धमादन पर्वत स्थित कुबेर के महल में चार वर्ष व्यतीत करने के पश्‍चात पाण्डव वहाँ से चले। मार्ग में अनेक वनों में रुकते-रुकाते, स्थान-स्थान पर अपने शौर्य और पराक्रम...

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  • द्रौपदी हरण
    15
    Feb

    द्रौपदी हरण

    अर्जुन के इन्द्रप्रस्थ से दिव्यस्त्र कि शिक्षा पाकर लौटने के बाद पाँचों पांडव द्रौपदी के साथ काम्यवन में अपना आश्रम बना कर रह रहे थे तभी एक बार पाँचों...

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  • पाण्डवों का अज्ञातवास
    15
    Feb

    पाण्डवों का अज्ञातवास

    ‘अज्ञातवास’ का अर्थ है- “बिना किसी के संज्ञान में आये किसी अपरिचित स्थान व अज्ञात स्थान में रहना।” वनवास के बारहवें वर्ष के पूर्ण होने पर पाण्डवों ने अब...

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  • द्रौपदी चीरहरण
    23
    Jan

    द्रौपदी चीरहरण

    दुर्योधन द्वारा विदुर को आज्ञा दी गई वह द्रौपदी को ले आये। इस पर विदुर ने कहा कि- “अपने-अपको दाँव पर हारने के बाद युधिष्ठिर द्रौपदी को दाँव पर...

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  • भीम द्वारा जयद्रथ की दुर्गति
    22
    Jan

    भीम द्वारा जयद्रथ की दुर्गति

    एक बार पाँचों पाण्डव आवश्यक कार्यवश बाहर गये हुए थे। आश्रम में केवल द्रौपदी, उसकी एक दासी और पुरोहित धौम्य ही थे। उसी समय सिन्धु देश का राजा जयद्रथ,...

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