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04
Dec

यूनेस्को विश्व धरोहर UNESCO World Heritage

मानवता के लिये अत्यंत महत्त्व के स्थान, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिये बचाकर रखना आवश्यक समझा जाता है, उन्हें विश्व धरोहर  के रूप में जाना जाता है। ऐसे महत्त्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण की पहल यूनेस्को द्वारा की जाती है। विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर संरक्षण को लेकर एक अंतर्राष्ट्रीय संधि  1972 में लागू की गई। विश्व धरोहर समिति इस संधि के तहत निम्न तीन श्रेणियों में आने वाली संपत्तियों को शामिल करती है:
1. प्राकृतिक धरोहर स्थल: ऐसी धरोहर जो भौतिक या भौगोलिक प्राकृतिक निर्माण का परिणाम या भौतिक और भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत सुंदर या वैज्ञानिक महत्त्व की जगह या भौतिक और भौगोलिक महत्त्व वाली जगह या किसी विलुप्ति के कगार पर खड़े जीव या वनस्पति का प्राकृतिक आवास हो सकती है।
2. सांस्कृतिक धरोहर स्थल:  इस श्रेणी की धरोहरों में स्मारक, स्थापत्य की इमारतें, मूर्तिकारी, चित्रकारी, स्थापत्य की झलक वाले शिलालेख, गुफा आवास और वैश्विक महत्त्व वाले स्थान, इमारतों का समूह, अकेली इमारतें या आपस में संबद्ध इमारतों का समूह, स्थापत्य में किया मानव का काम या प्रकृति और मानव के संयुक्त प्रयास का प्रतिफल, जो कि ऐतिहासिक, सौंदर्य, जातीय, मानवविज्ञान या वैश्विक दृष्टि से महत्त्व की हो, शामिल की जाती हैं।
3. मिश्रित धरोहर स्थल: इस श्रेणी के अंतर्गत वह धरोहर स्थल आते हैं, जो प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों ही रूपों में महत्त्वपूर्ण होते हैं।

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